teri bhi kam hi sun paata hooñ man | तेरी भी कम ही सुन पाता हूँ मन

  - BR SUDHAKAR

तेरी भी कम ही सुन पाता हूँ मन
हाँ बिलकुल मैं तेरे जैसा हूँ मन

शायर बनने का ये मुनाफ़ा है दोस्त
मैं इक शे'र से बहला देता हूँ मन

दोस्त सभी से शिकवा क्या हो मेरा
मैं तो तेरे भी नईं बैठा हूँ मन

दुनिया के धोखे से ये डिग्री पाई
बंदा देख अब मैं पड़ देता हूँ मन

मुझको जो तू भटकाने में लगा है
रुक मैं तेरे ही मन की करता हूँ मन

  - BR SUDHAKAR

Dosti Shayari

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