tees kha kar gham chhupaakar ro raha hai | टीस खा कर ग़म छुपाकर रो रहा है

  - SHIVANKIT TIWARI "SHIVA"

टीस खा कर ग़म छुपाकर रो रहा है
वो फ़क़त आँसू बहाकर रो रहा है

हिज्र के क़िस्से सुनाकर महफ़िलों में
आजकल वो मुस्कुराकर रो रहा है

कैद करके ख़ुद को ख़ुद के घोंसले में
उसके सारे ख़त जलाकर रो रहा हैॆ
'इश्क़ था जब तो बहुत नज़दीकियाँ थी
अब है जुदा तो दूर जाकर रो रहा है

ख़्वाब में भी उस सेे मिलने की है ख्व़ाहिश
इसलिए तकिया भिगाकर रो रहा है

  - SHIVANKIT TIWARI "SHIVA"

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