कूज़ागर को प्यारा था

चाक पे नाम हमारा था

लब पे तबस्सुम बिखरा था
आँख में पानी खारा था

उतर गया है वो दिल से
आँखों का जो तारा था

प्यास से अपनी जीत गया
दरिया से जो हारा था

दैर-ओ-हरम से हार गया
लोगों को जो प्यारा था

मेरी पैदाइश‌ से क़ब्ल
टूटा कोई तारा था

ख़ाक-मिले जो नक़्श-ए-पा
राज़ उन्हीं में सारा था

वो मुरझाने से पहले
फूल बहुत ही प्यारा था

— Tarun Bharadwaj

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