"बुरा"

तुम मुझे बुरा कहते हो
तो फिर क्यूँ मुझे अच्छा नहीं करते

देते हो बार-हा हिदायत-ए-ताअत-ओ-ज़ोहद
गर फ़िक्र-ए-हक़ीक़तन है तो क्यूँ दुआ नहीं करते

माना कि बीमार मैं और चारा-गर तुम
किस ने रोका है तुम्हें क्यूँ मेरी दवा नहीं करते

कौन रक़ीब क़रीब है कौन क़रीब रक़ीब है किस को पता
मैं कैसे मान लूँ तुम पीठ पीछे दग़ा नहीं करते

ज़मीन-ओ-आसमाँ फ़ट जाएँगे एक दिन और सूरज भी आ गिरेगा
लोग तब भी यही कहते होंगे हम किसी का बुरा नहीं करते

हम ने माना गर मोमिन नहीं तो काफ़िर भी नहीं तालिब
हमें झुकते नहीं देखा मतलब ये नहीं कि हम सज्दा नहीं करते

— Mohammad Talib Ansari

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