फिर थोड़ी ही देर में ये बिस्तर मक़्तल होना है
इस से पहले ही क़ातिल, तुझ को ओझल होना है
जाओ कोई शिकवा नईं, अपनी अपनी मर्ज़ी है
तुझ को आँसू होना है, मुझ को काजल होना है
हूर क़तारों में लग कर फिर कहती थी ये मुझ से
मुझ को पागल होना है, मुझ को पागल होना है
ख़्वाब बुना करती थी बाप बनाने के मुझ को जो
ग़ज़ब सितम है उस के बच्चों का अंकल होना है
हम गुल से भी टकराएँ तो चोट आएगी 'लाजो
तेरी ख़ातिर तो पत्थर को भी मख़मल होना है
— Aarush Sarkaar















