ik sadaa hamko tere har haal ki bhi aa rahi hai | इक सदा हमको तेरे हर हाल की भी आ रही है

  - Aarush Sarkaar

इक सदा हमको तेरे हर हाल की भी आ रही है
यार इतना भी न बन अब हमको हिचकी आ रही है

उसकी खुदगर्ज़ी को गुल बेचारा ये समझा कि बे-शक
उस सेे मिलने को ही रोज़ाना वो तितली आ रही है

मोजिज़ा था या शरारत रात की मालूम नहीं ये
नींद में कल ख़्वाब देखा नींद अच्छी आ रही है

शहर के उसके सुख़न-फ़हमों ने है हमको बुलाया
किसकी चिट्ठी आनी थी और किसकी चिट्ठी आ रही है

'इश्क़ में तोहफ़े ये सब उस सेे मिले हैं हमको साहब
इस घड़ी को देखिए आप और अँगूठी आ रही है

गोली ना चल जाए मेरी साइकिल से उतरो भी अब
रस्ता पूरा हो गया तेरी हवेली आ रही है

इक ज़माने से मैं तन्हा जागता हूँ और 'आरुष
'उम्र इक गुज़री है शब ये तन्हा सोती आ रही है

  - Aarush Sarkaar

Good night Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Aarush Sarkaar

As you were reading Shayari by Aarush Sarkaar

Similar Writers

our suggestion based on Aarush Sarkaar

Similar Moods

As you were reading Good night Shayari Shayari