बस इक पल में मुझे तुम सा तुम्हें मुझ सा बना देगा

अभी देखो ये पहिया वक़्त का क्या क्या बना देगा

सियाने आदमी हो, इश्क़ के चक्कर में मत पड़ना
तुम्हें बर्बाद कर देगा, तुम्हें अच्छा बना देगा

ख़ुदा चालाक है वो तिश्नगी तो क्या बुझाएगा
बना देगा समुंदर और उसे खारा बना देगा

बड़ी मुद्दत से ख़्वाहिश है उसे इक रोज़ मिलने की
मिलेगा एक लम्हे को मुझे ज़िंदा बना देगा

भले ही हौसला हर इक दफ़ा वो तोड़ दें मेरा
यक़ीं मेरा उसे हर बार दोबारा बना देगा

विसाल-ए-यार को 'अल्फ़ाज़' में लिख पाओगे कैसे
वो इक एहसास हर इक लफ़्ज़ को बौना बना देगा

— Saurabh Mehta 'Alfaaz'

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