कभी वो गीत गाती है नई लड़की
मुझे अपना बताती है नई लड़की
कई अरसे हुऐ हैं, है क़फ़स में जाँ
मुझे दुनिया दिखाती है नई लड़की
सुख़न वाले उसे भाने लगे है अब
ग़ज़ल में डूब जाती है नई लड़की
कभी जो शाम कहता चाँद बन जाती
हवा-सी पास आती है नई लड़की
उसी के यार से नफ़रत हुई है जो
उसी पे जाँ लुटाती है नई लड़की
कहीं पे दीप जलते बोल उठती वो
नज़र से दिल जलाती है नई लड़की
ज़माने से नहीं डरता 'तिवारी' अब
मोहब्बत से डराती है नई लड़की
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