फिर एक मुल्क आज़ाद बने
जब मक़सद देश बनाना था
हम हिस्से ले कर क्यूँ बैठे
जब इतिहास बताना था सब को
हम क़िस्से ले कर क्यूँ बैठे
बोलो हम हिन्दुस्तानी हैं
बस क्षेत्र प्रांत रटना छोड़ो
क्या ज़ात पात क्या भेद-भाव
तुम टुकड़ों में बॅंटना छोड़ो
हम आपस में उलझे हैं
दुनिया तो आगे चली गई
अपनी मेधा अपनी मेहनत तो
राजनीति से छली गई
कोशिश हम को ये करनी है
हम मिल कर के फ़ौलाद बनें
अपना वजूद साबित कर के
फिर एक मुल्क आज़ाद बने
— Gulshan















