"पागल"
वो मुझे कहती थी पागल
सो मैं भी हो गया पागल
और मेरी चाहत थी ही क्या
बस तुम्हें चाहा है पागल
मैं कहता प्यार है मुझे
वो कहती क्या कुछ भी पागल
मैं उसे अपना जान कर कुछ कहता
वो समझती थी मुझे पागल
वो सब को अपना दोस्त कहती
मेरे ग़ुस्से पे कहती अरे पागल
— Vikash krishiv















