दो पल की दिल-लगी रही दो पल रहा सफ़रअब हिस्से रह गया है तेरा हिज्र उम्र भरमैं चाहता था चलना तेरे साथ बा-क़दमपर खा गया ज़माने की रुस्वाइयों का डर— ALI ZUHRI