नहीं मैं राम

नहीं मैं राम जो हँसते हुए सब दुख ये सह जाऊँ
नहीं मैं राम जो शबरी के जूठे बेर तक खाऊँ

नहीं मैं राम सा भाई
नहीं मैं राम सा त्यागी
नहीं मैं उन के जैसा आज्ञाकारी
नहीं मैं उन सा मर्यादा का पालन करने वाला हूँ
नहीं मैं उन के जैसा सबका प्यारा हूँ
नहीं मैं धर्म पर यूँ चलने वाला हूँ
नहीं मैं उन के जैसा हर किसी को मान देता हूँ

नहीं मैं वो जो केवट को गले अपने लगाता है
जो ऊँचा नीचा करने को मना करता
बड़ा छोटा भुलाकर जो दया करता

नहीं मैं राम सा भटकू यहाँ वन में
नहीं है राम सा धीरज यहाँ मुझ
में
नहीं है राम सा आदर यहाँ मुझ
में
नहीं है राम सा संकल्प भी मुझ
में

मैं इक मामूली सा मानव
जो लोभी है जो झूठा है
दिखावा है बदलता है
बहुत ही आलसी भी है
जो जपता राम तो है राम पथ पे चलने से डरता
भला क्यूँ है

— Karan Shukla

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