जो भी उस के मुँह से निकले
सारे वादे झूठे निकले
दश्त-ए-दिल में खो कर भी हम
दश्त-ए-दिल से अच्छे निकले
आँखें जब भी मूँदीं मैं ने
सपने सारे देखे निकले
एक भिखारी के कासे में
सारे सिक्के खोटे निकले
इश्क़ की इन टेढ़ी गलियों में
जो आए बस रोते निकले
इश्क़ कुएँ में गिरकर भी तुम
सारे ज़िन्दा कैसे निकले
झूठ उस के जितने मीठे थे
सच उतने ही कड़वे निकले
इश्क़ मोहब्बत के ये सौदे
हद से ज़्यादा महँगे निकले
उस के झूठ गवाही दे आए
अपने सच भी गूँगे निकले
हम मरने से डरने वाले
सब से पहले मरने निकले
आँखें अच्छी निकलीं मेरी
चश्में थोड़े धुँधले निकले
प्यार वफ़ा की क़स
में वादे
सब के सब बस जुमले निकले
प्यार का रस्ता दिखला तो दूँ
फिर मत कहना काँटे निकले
ख़ुद को मैं ने जब भी खोला
रूह के टुकड़े टुकड़े निकले
लोग आए मेरी मय्यत पर
आए रोए भूले निकले















