उस गली में जाने से ख़ुद को बचाए जा रहे हैं
जिस
में गीत अब दूसरों के गुनगुनाए जा रहे हैं
हम कभी काजल रहे थे उस की आँखों का मगर अब
हम ही हैं जो उस की आँखों से गिराए जा रहे हैं
एक ही तो ज़ख़्म है जो पाया है हम ने अभी तक
एक ही तो ज़ख़्म है जिस को छिपाए जा रहे हैं
रख लिए हैं कुछ नए गमले अब उस ने अपनी छत पर
सो हमारी छत से भी गमले हटाए जा रहे हैं
ख़त बहुत शिद्दत से लिखकर उस को भिजवाए थे हम ने
अब वही ख़त हैं जो शिद्दत से जलाए जा रहे हैं
ज़िंदगी बर्बाद कर के इस मोहब्बत में ये सीखा
लड़के इस के नाम पर पागल बनाए जा रहे हैं
— Yuvraj Singh Faujdar















