“ख़्वाहिशें”

सुनो एक बात कहनी है तुम से
बहुत दिन से सोच रहा था
आज हिम्मत हुई है सो कह रहा हूँ
तुम मेरे साथ ही रहोगी ना
तुम मेरे पास ही रहोगी ना
हमेशा हमेशा के लिए
मैं नहीं चाहता कि हम जुदा हों कभी
यूँ ही साथ चलते रहे
यूँ ही हँसते रहे खिलते रहे
मैं तुम को देखता रहूँ तुम मुझे
मैं तुम को सोचता रहूँ तुम मुझे
कभी तुम आओ मिलने कभी मैं
कभी तुम रूठो तो कभी मैं
मैं तुम को मेरी ग़ज़लें सुनाऊँ और तुम मान जाओ
मैं तुम को गले से लगाऊँ और तुम मान जाओ
मैं जाने का कहूँ तो तुम लिपट पड़ो
कुछ कहने का कहूँ तो तुम सिसक पड़ो
मैं चाहता हूँ कि हम साथ साथ चलें
जैसे रेल की पटरियाँ हैं ना ठीक वैसे
भले कभी एक न हो पाएँ
लेकिन आख़िरी मंज़िल तक हम बने रहें साथ में
देखते रहें एक दूसरे के सफ़र को
जीते रहें एक दूसरे के सफ़र को
खोते रहें एक दूसरे को सफ़र में
मिलते रहें एक दूसरे को सफ़र में
बस जुदा न हों कभी
ख़फ़ा न हों कभी
यूँ ही चलते रहना है हम को
यूँ ही खिलते रहना है हम को
मरना नहीं है हमें एक दूजे के लिए
जीना है बहुत जीना है एक दूजे के लिए

— Yuvraj Singh Faujdar

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