"शायद मेरा दुख समझ पाओ तुम"

कभी अंदाज़ा तो लगाओ तुम
शायद मेरा दुख समझ पाओ तुम

हर घड़ी मैं ने बस तुम्हारा इंतिज़ार किया
अपने ख़्वाबों में, ख़यालों में तुम्हें प्यार किया
इक दफ़ा ही सही, मुझे सीने से लगाओ तुम
हाँ शायद मेरा दुख समझ पाओ तुम

पल-पल डरता रहा हूँ तुम्हें खोने से भी
पास आने से भी दूर होने से भी
मुझे ख़ुद में छुपा सको तो छुपाओ तुम
हाँ शायद मेरा दुख समझ पाओ तुम

सूना सूना तुम बिन मुझे जहाँ लगे
जैसे चाँद बिन सूना आसमाँ लगे
फिर से मेरी दुनिया में लौट आओ तुम
हाँ शायद मेरा दुख समझ पाओ तुम

— Vikas Sangam

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