भले कामों पे बदगोई की चुनरी डाल देते हैं
सियासी लोग अच्छाई पे मिट्टी डाल देते हैं
बड़े किरदार भी बिकते हैं लालच की दुकानों पर
बुरे जब जेब में नोटों की गड्डी डाल देते हैं
बहुत आसाँ है झूठे मज़हबी लोगों को लड़वाना
अगर कुत्ते लड़ाना हों तो हड्डी डाल देते हैं
उतर जाते हैं ले कर कश्तियाँ जो चढ़ते दरिया में
वही तूफ़ान के पैरों में बेड़ी डाल देते हैं
मदद की मत रखो उम्मीद ऐसे रहनुमाओं से
भिकारी के जो कासे में डकैती डाल देते हैं
बहुत मजबूर हो जाते हैं जब माँ-बाप ऐ यावर
गले में अपने बच्चों के ही रस्सी डाल देते हैं
— YAWAR ALI















