अगर तुम पर जुनूँ तारी नहीं है
तुम्हारा इश्क़ मेयारी नहीं है
अभी बंद-ए-क़बा मत खोल अपने
मेरी आँखों की तैयारी नहीं है
तेरे नख़रे उठाए तो ये जाना
ये दुनिया इस क़दर भारी नहीं है
वो गहरे ख़्वाब में डूबे हुए हैं
जिन्हें सोने की बीमारी नहीं है
मोहब्बत कर रहे हैं हम कि हम में
बहुत ज़्यादा समझदारी नहीं है
हमारे ख़्वाब टूटे जा रहे हैं
मगर आँखों में बेदारी नहीं है
— ZARKHEZ















