सब को रातें बाँट रहा है
सूरज जिस का नाम रखा है
इक बच्चे ने मॉल में पूछा
सर्दी का दिन कितने का है
ऐ साहिल पर चलने वाले
दरिया तुझ को घूर रहा है
अपने घर में आग लगा कर
अब वो टी वी देख रहा है
मुझ को हासिल मुख़्तारी है
लेकिन मेरे हाथ में क्या है
दौड़ो जाओ कुर्सी लाओ
रुपया नीचे बैठ रहा है
अब वो सब को भटका देगा
उस ने रस्ता देख लिया है
— ZARKHEZ















