'स्लीपिंग पिल एडिक्शन'
काफ़ी देर से शब बेचारी
टहल रही है इस कमरे में
और मैं बोझल पलकें लेकर
लेटे-लेटे
कुछ घंटों से
घूर रहा हूँ
मेज़ पे रखे
उस डब्बे को जिसमें मेरी नींद के ज़र्रे पड़े हुए थे
कल तक तो मैं
अपना हर इक शोरीदा दिन
इक ज़र्रे की तह में रख कर
पानी के इक घूँट के साथ निगल जाता था
लेकिन आज ये बोझल आँखें जाग रही हैं
नींद मिरे कमरे का रस्ता भूल चुकी है
डब्बा खाली पड़ा हुआ है
और मिरा इक शोरीदा दिन
मुझ को ज़र्रा-ज़र्रा कर के निगल रहा है
— ZARKHEZ















