हमारी आँख में पहले तो मिट्टी झोंक जाएँगेवही फिर काँच के आँसू इकट्ठे करने आएँगेअगर ज़ाहिर करूँगा आसमाँ पर ख़्वाहिशें अपनीमुझे इस बात का डर है सितारे टूट जाएँगे— ZARKHEZ