
मौसम-ए-ग़म रहते यहाँ हम सेे न रोया जाएगा
रख ख़्वाब पलकों पर कभी हम से न सोया जाएगा
लाशें दफ़न होते कई देख़ी न गिन कोई सके
डर बंद आँखों से कभी हम से न खोया जाएगा
— Zain Aalamgir
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