ये अलग बात मुक़द्दर नहीं बदला अपना
एक ही दर पे रहे दर नहीं बदला अपना
इश्क़ का खेल है शतरंज नहीं है साहिब
मात खाई है मगर घर नहीं बदला अपना
जाने किस वक़्त अचानक उसे याद आ जाए
मैं ने ये सोच के नंबर नहीं बदला अपना
— Aadil Rasheed
एक ही दर पे रहे दर नहीं बदला अपना
इश्क़ का खेल है शतरंज नहीं है साहिब
मात खाई है मगर घर नहीं बदला अपना
जाने किस वक़्त अचानक उसे याद आ जाए
मैं ने ये सोच के नंबर नहीं बदला अपना
Other ghazal from the same pen
Shers of ishq shayari collection.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling