कैसी वहशत मेरे अंदर आ गईजब अचानक वो बराबर आ गईझूठ उस को और ख़ुद को ये कहाज़िन्दगी में उस से बेहतर आ गईख़ामुशी कुछ पल थी अपने दरमियाँफिर हया की एक चादर आ गईख़ूब समझा मैं भी शाइ'र की ज़बाँशा'इरी जब मेरे ऊपर आ गईहैं तरक़्क़ी के ये सारे मोजिज़ेआप कहती नस्ल तू पर आ गई— Aadil Sulaiman