जो मिली नज़रें तो क़यास हुआ
देख ले जो भी बद-हवा से हुआ
जितने दिन भी कटे हैं उस के बगै़र
मेरा हर इक वो दिन भी मास हुआ
लाँघ ली मैं ने जिस्म की सरहद
रूह का मेरी वो लिबास हुआ
— Abhay Aadiv
देख ले जो भी बद-हवा से हुआ
जितने दिन भी कटे हैं उस के बगै़र
मेरा हर इक वो दिन भी मास हुआ
लाँघ ली मैं ने जिस्म की सरहद
रूह का मेरी वो लिबास हुआ
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