उस का होना अलग बात है
मिलना उस सा अलग बात है
मुस्कुराना अलग बात है
शाद रहना अलग बात है
इश्क़ करना तो है और बात
ये निभाना अलग बात है
बाक़ी एहसास अपनी जगह
उस का छूना अलग बात है
भूलना चाहता हूँ तुम्हें
पर भुलाना अलग बात है
बातों बातों में ही बीती रात
बात करना अलग बात है
तुम 'अभय' उस को क्यूँ हो पसंद
तुम में कुछ क्या अलग बात है?
— Abhay Aadiv















