milan ki saaat ko is tarah se amar kiya hai | मिलन की साअत को इस तरह से अमर किया है

  - Aanis Moin

मिलन की साअत को इस तरह से अमर किया है
तुम्हारी यादों के साथ तन्हा सफ़र किया है

सुना है उस रुत को देख कर तुम भी रो पड़े थे
सुना है बारिश ने पत्थरों पर असर किया है

सलीब का बार भी उठाओ तमाम जीवन
ये लब-कुशाई का जुर्म तुम ने अगर किया है

तुम्हें ख़बर थी हक़ीक़तें तल्ख़ हैं जभी तो!
तुम्हारी आँखों ने ख़्वाब को मोतबर किया है

घुटन बढ़ी है तो फिर उसी को सदाएँ दी हैं
कि जिस हवा ने हर इक शजर बे-समर किया है

है तेरे अंदर बसी हुई एक और दुनिया
मगर कभी तू ने इतना लम्बा सफ़र किया है

मिरे ही दम से तो रौनक़ें तेरे शहर में थीं
मिरे ही क़दमों ने दश्त को रह-गुज़र किया है

तुझे ख़बर क्या मिरे लबों की ख़मोशियों ने
तिरे फ़साने को किस क़दर मुख़्तसर किया है

बहुत सी आँखों में तीरगी घर बना चुकी है
बहुत सी आँखों ने इंतिज़ार-ए-सहर किया है

  - Aanis Moin

Hawa Shayari

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