मेरे दिल ने कहा तब हीं ये लड़का मैं नहीं हूँ

महज़ उस से मिला था और फिर क्या? मैं नहीं हूँ

उसी का प्यार हूँ मैं यार तेरा मैं नहीं हूँ
समझ जैसा रहा है तू, न वैसा मैं नहीं हूँ

कहा कैसे ये था तुम ने तिरा कोई नहीं है
इधर देखो, कहो फिर से जरा, क्या मैं नहीं हूँ?

तिरे ही नाम कर दी और तुम हो ज़िन्दगी जब
क़सम अपनी किसी भी हाल खाता मैं नहीं हूँ

गया थक दोहरी सी ज़िन्दगी जीकर यहाँ पर
रहा हैं हँस ये मेरा मुखौटा ,मैं नहीं हूँ

अभी तो ग़म है तेरे साथ सो कोई न होगा
अभी तो सब कहेंगे मैं नहीं हूँ ,मैं नहीं हूँ

मुझे मालूम है कल ये कहेंगे यार है आतिश
यही वो लोग हैं कि आज जिन का मैं नहीं हूँ

— Aatish Alok

More by Aatish Alok

Other ghazal from the same pen

See all from Aatish Alok →

Aadmi Shayari

Shers of aadmi.

All Aadmi Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling