आदतन मुझको प्यार करना है
आदतन उसको वार करना है
जीतने वाले शाम को मिलना
हार का जश्न यार करना है
नद्दी ने पार कर लिया पर्वत
अब समंदर को पार करना है
रूह तो मेरे पास है उसकी
जिस्म का इन्तिज़ार करना है
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