मर्ज़ी न थी पर सिलसिला बनता रहा
मिलने का उस सेे वास्ता बनता रहा
मिलते रहे और राब्ता बनता रहा
चलते रहे तो रास्ता बनता रहा
अच्छा हुआ झगड़े मगर बिछड़े नहीं
मिलते रहे तो ज़ाबता बनता रहा
मशग़ूल बातों में हुए इस तरह से
पूछा तो था पर नाश्ता बनता रहा
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