हल्की सी आहट भर से दिल का दरवाज़ा खुलता था
एक ज़माना वो भी था जब मुझ पे पूरा खुलता था
थोड़ी खट-पट होती है तो दीवारें उठ जाती हैं
पहले बातें होती रहती थीं तो रस्ता खुलता था
जब से उसने 'इश्क़ किया है तब से दरिया बहता है
पहले आँखों में से जन्नत का दरवाज़ा खुलता था
बिन चिट्ठी-बिन तार के आते जाते थे तब संदेशे
उसने खिड़की गर खोली तो मेरा कमरा खुलता था
अच्छे से जाना करती थी वो कि मुझे क्या भाता है
मुझ सेे नज़रें टकराऍं तो उसका जूड़ा खुलता था
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