मौत के पास कर रही भी है

और वही मेरी ज़िंदगी भी है

उस के होंठों पे मुस्कुराहट है
उस की आँखों में इक नमी भी है

उस के दिल में बहुत सी बातें हैं
और होंठों पे ख़ामुशी भी है

उस की आँखों के सामने हो तो
मेरी तस्वीर बोलती भी है

पहले रख कर के भूलती है मुझे
बा'द में मुझ को ढूँढती भी है

इस जहाँ के घने अँधेरे में
उस के होने से रौशनी भी है

शर्त ये भी कि ज़िन्दा रहना है
हिज्र की रात काटनी भी है

सोचता हूँ कि अब भुला दूँ उसे
मेरी रग रग में वो बसी भी हैं

दर्द-ए-दिल की अहम दवाओं में
इक दवाई ये शा'इरी भी है

— Adv Aaves Shaikh

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