ज़िंदगी की बहुत बड़ी ख़ता हूँ मैंज़िंदगी को बिना वजह अता हूँ मैंलोगों की आँखों से जो देखा ख़ुद को हैंसर-ब-सर लगता हैं फ़क़त ख़ता हूँ मैंशहर से लौट कर न पूछा जो कभीबूढ़े उन माई बाप का पता हूँ मैंपूछेंगे मेरे अपने तो बताना मतशहर की किस गली में लापता हूँ मैं— aayush dahat