जान मेरी होना है सबका फ़ैसला इक दिन

सब को ही गुनाहों की मिलनी है सज़ा इक दिन

फूट फूट कर जानाँ तुम भी ख़ूब रोओगे
याद आएगी तुम को मेरी ये वफ़ा इक दिन

तुम ने भी दग़ा की है तुम से भी दग़ा होगी
तुम को भी दिखाएगा वक़्त आइना इक दिन

छोड़ देगा जब कोई यूँ ही बे सहारा कर
तुम भी जान जाओगे ज़िंदगी है क्या इक दिन

कौन है जो बच पाया वक़्त के हिसाबों से
वक़्त तोड़ देता है सब को साहिबा इक दिन

— Ajeetendra Aazi Tamaam

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