तेरे ख़याल से फूटा था ख़्वाब कहते हैं
तुझे हयात का लुब्ब-ए-लुबाब कहते हैं
चुना है तूने मुझे ज़िन्दगी के दामन में
मुझे ये लोग तेरा इंतिख़ाब कहते हैं
इसी का नाम रवानी है बरसर-ए-दरिया
इसी को दश्त में प्यासे शराब कहते हैं
गुनाहगार है उसके सो उसकी महफ़िल में
हम उसके हुस्न को उसका नक़ाब कहते हैं
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