न पूछ कितने है बेताब देखने के लिए
हम एक साथ कईं ख़्वाब देखने के लिए
मैं अपने आप से बाहर निकल के बैठ गया
कि आज आएँगे अहबाब देखने के लिए
जमाने बा'द बिल-आख़िर वो रात आ गई है
कि लोग निकले है महताब देखने के लिए
सुनहरी लड़कियों इनको मिलो मिलो न मिलो
गरीब होते है बस ख़्वाब देखने के लिए
मुझे यक़ीं है कि तुम आईना भी देखोगे
मेरी शिकस्त के असबाब देखने के लिए
— Abbas Tabish















