judaai ka zamaana yuñ thikaane lag gaya tha | जुदाई का ज़माना यूँँ ठिकाने लग गया था

  - Abbas Tabish

जुदाई का ज़माना यूँँ ठिकाने लग गया था
बिछड़ कर उस सेे मैं लिखने लिखाने लग गया था

तभी तो ज़ंग आलूदा हुई तलवार मेरी
मैं दुश्मन पर मुहब्बत आज़माने लग गया था

अभी समझा रहा था वो मुझे बोसे का मतलब
कि मैं शहतूत के रस में नहाने लग गया था

मोहब्बत हो नहीं पाई तो उसका क्या करूँँ मैं
कि मैं तो उस गली में आने जाने लगे गया था

तभी तो मेरी आँखों को नहीं रोने की आदत
मैं छोटी 'उम्र में आँसू छुपाने लग गया था

  - Abbas Tabish

Valentine Shayari

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