कुछ तो अब भी बाक़ी होगा देख ज़रा मय-ख़ाने में
मान रहा हूँ मुझको थोड़ी देर हुई है आने में
पागलपन की हद क्यूँ माने पलभर के परवाने को
जोश बहुत होता है लेकिन नए नए दीवाने में
इतने भी मुश्किल न हुए बाँहों में तुम्हारी आ न सकें
इतने भी आसान नहीं थे आ जाएँ पैमाने में
यार मुसव्विर इतने में तो एक ख़ुदा बन जाता है
जितना वक़्त लिया है तुमने इक तस्वीर बनाने में
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Abhishar Geeta Shukla
our suggestion based on Abhishar Geeta Shukla
As you were reading Bhai Shayari Shayari