सब सेे मेरी अन बन है
दुनिया मेरी दुश्मन है
जब भी तुम दिख जाती हो
थम जाती ये धड़कन है
इस घर में सब से सच्चा
इकलौता बस दर्पण है
सच को सच कहने से यार
कट जाती अब गर्दन है
लगता है जो प्यार तुम्हें
शायद वो पागलपन है
— Adarsh Akshar
दुनिया मेरी दुश्मन है
जब भी तुम दिख जाती हो
थम जाती ये धड़कन है
इस घर में सब से सच्चा
इकलौता बस दर्पण है
सच को सच कहने से यार
कट जाती अब गर्दन है
लगता है जो प्यार तुम्हें
शायद वो पागलपन है
Other ghazal from the same pen
Shers of nafrat.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling