है ग़म वही है दर्द वही हाल दोस्तों
और आ गया है फिर से नया साल दोस्तों
ख़ंजर वही है ज़ख़्म वही खाल दोस्तों
कहते हैं आ गया है नया साल दोस्तों
हम जिन को दे रहे हैं नए साल की बधाई
वो जा रहे हैं छोड़ के ससुराल दोस्तों
इतने दिनों के बा'द तो आया हूँ छूट कर
वो बाल की निकाल रहे खाल दोस्तों
कुछ वक़्त के लिए मुझे जन्नत सी मिल गई
होंटों तक आ गया था वो रूमाल दोस्तों
— Prashant Kumar















