mohabbat ka hi charcha kyun karoon main | मोहब्बत का ही चर्चा क्यूँँ करूँँ मैं

  - Prashant Kumar
मोहब्बतकाहीचर्चाक्यूँँकरूँँमैं
किसीसेयारझगड़ाक्यूँँकरूँँमैं
मिरीतस्वीरदेखाक्यूँँकरेतू
तिरीबाहोंमेंसोयाक्यूँँकरूँँमैं
अरेमैंभीमुनाफ़ाचाहताहूँ
तोफिरघाटाकिसीकाक्यूँँकरूँँमैं
अरेग़ुस्साहोबसयेबतादे
तिरीआँखोंसेपर्दाक्यूँँकरूँँमैं
मिरेहाथोंसेखायाक्यूँँकरेतू
तिरेहाथोंसेखायाक्यूँँकरूँँमैं
मिरेकमरेमेंआयाक्यूँँकरेतू
तिरेकमरेमेंजायाक्यूँँकरूँँमैं
मुझीकोदर्दसहनाहैजबअपना
तोफिरसबमेंतमाशाक्यूँँकरूँँमैं
मिरेआँगनमेंखेलाक्यूँँकरेतू
तिरेआँगनमेंखेलाक्यूँँकरूँँमैं
किसीकारंज-ओ-ग़ममैंक्यूँँख़रीदूँ
अरेयारइतनाख़र्चाक्यूँँकरूँँमैं
मुझेपहनायाकपड़ेक्यूँँकरोतुम
अरेनंगाहीघूमाक्यूँँकरूँँमैं
अरेपास-ए-वफ़ाहीक्यूँँकरोतुम
तुम्हारीबातभूलाक्यूँँकरूँँमैं
मिरीहीबातमानाक्यूँँकरोतुम
तुम्हारीबातमानाक्यूँँकरूँँमैं
अरेजबतुमहीमेरीज़िंदगीहो
तुम्हारेबिनगुज़ाराक्यूँँकरूँँमैं
  - Prashant Kumar
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