पहला प्यार
पहली दफ़ा जब आँख मिली तो दिल में उठे तूफ़ान कई
दिल ने दिल का हाल सुनाया जागे फिर अरमान कई
उन का बदन नाज़ुक नाज़ुक था देख के हम शर्माए बहुत
दोनों अंजाने थे लेकिन इक दूजे को भाए बहुत
ख़ुद को बड़ी मुश्किल से सँभाला ऐसा लगा अब जान गई
रुख़ से पल्लू जब सरकाया फिर तो हुए बेजान कई
हँसते हुए लट बिखरा के वो सामने आ कर बैठ गए
शर्म से हम ने उठना चाहा वो तो हम पर ऐंठ गए
हाथ पकड़ के पास बिठाया प्यार की बातें करने लगे
गाल भी चू
में हाथ भी चू
में और किए एहसान कई
अगले दिन जब याद आई तो दिल जोरों से रोने लगा
प्यार था पहला दिल था ज़िद्दी पीछे पीछे आ ही गया
हम ने दिल को रोकना चाहा और इसे समझाया भी
लेकिन इसने एक न मानी और किए नुक़सान कई















