सुना करती थीं चुपके से मेरी हर बात दो आँखें
समझती थीं वो मेरे दिल के सब जज़्बात दो आँखें
मियाँ रस्ते में हम ने भी कभी ठोकर नहीं खाई
मुहब्बत में चलीं जब तक हमारे साथ दो आँखें
मेरे कानों में बजते रहते हैं संगीत पायल के
मेरी आँखें में चलती रहती हैं दिन रात दो आँखें
नहीं मुमकिन हों पूरे अब मेरे देखे हुए सपने
ज़रा सा वक़्त है उस पर बड़े लम्हात दो आँखें
नज़र बतला ही देती है हम इंसाँ हैं कि हैवाँ हैं
यक़ीं मानो बताती हैं हमारी ज़ात दो आँखें
— Adesh Rathore















