यहाँ जो है हमारे रूबरू है
जिधर मैं देखता हूँ तू ही तू है
मुझे अपना बना ले यार मेरे
हमारी आख़िरी ये आरज़ू है
जिधर देखा उधर बस तुम दिखे हो
नज़ारा ये नज़ारा चार-सू है
तुम्हें तो देखना जैसे इबादत
हमारी आँख भी अब बा-वज़ू है
यक़ीनन कुछ मिनट थे पास मेरे
मगर अफ़ज़ल तुम्हारी मुश्क बू है
ज़रा सी बात से ही डर गया मैं
मुझे लगने लगा सच में अदू है
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