क़िबला-ए-आब-ओ-गिल तुम्हीं तो हो

काबा-ए-जान-ओ-दिल तुम्हीं तो हो

ला-मकाँ दूर दिल बहुत नज़दीक
मुंफ़सिल मुत्तसिल तुम्हीं तो हो

मेरे पहलू में दिल न क्यूँ हो ख़ुश
दिल के पहलू में दिल तुम्हीं तो हो

तुम से मिल कर ख़जिल हमीं तो हैं
हम से छुट कर ख़जिल तुम्हीं तो हो

दिल की सख़्ती का है गिला तुम से
जिस ने रक्खी ये सिल तुम्हीं तो हो

जीते जी मुझ को मार डालो तुम
मालिक जान-ओ-दिल तुम्हीं तो हो

तुम को 'माइल' बहुत है शर्म-ए-गुनाह
रात-दिन मुन्फ़इल तुम्हीं तो हो

— Ahmad Husain Mail

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