इश्क़ में कौन बता सकता है
किस ने किस से सच बोला है
हम तुम साथ हैं इस लम्हे में
दुख सुख तो अपना अपना है
मुझ को तो सारे नामों में
तेरा नाम अच्छा लगता है
भूल गई वो शक्ल भी आख़िर
कब तक याद कोई रहता है
— Ahmad Mushtaq
किस ने किस से सच बोला है
हम तुम साथ हैं इस लम्हे में
दुख सुख तो अपना अपना है
मुझ को तो सारे नामों में
तेरा नाम अच्छा लगता है
भूल गई वो शक्ल भी आख़िर
कब तक याद कोई रहता है
Other ghazal from the same pen
Shers of mahatma gandhi shayari collection.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling