नहीं मुमकिन कि रग-ए-जाँ कोई लर्ज़िश न करे
तू मिरे पास हो और दिल मिरा शोरिश न करे
उसके पैग़ाम ने उम्मीद को भी तोड़ दिया
उसका कहना है मुझे पाने की कोशिश न करे
इक अयादत से मिरा हाल बदल सकती है
उस सेे कहना मिरे हालात की पुर्सिश न करे
शहर में 'अहमद'-ए-मग़रूर से मशहूर हूँ मैं
उस सेे कहना कि मिरे ख़त की नुमाइश न करे
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