नहीं मुमकिन कि रग-ए-जाँ कोई लर्ज़िश न करे
तू मिरे पास हो और दिल मिरा शोरिश न करे
उस के पैग़ाम ने उम्मीद को भी तोड़ दिया
उस का कहना है मुझे पाने की कोशिश न करे
इक अयादत से मिरा हाल बदल सकती है
उस से कहना मिरे हालात की पुर्सिश न करे
शहर में 'अहमद'-ए-मग़रूर से मशहूर हूँ मैं
उस से कहना कि मिरे ख़त की नुमाइश न करे
— Faiz Ahmad















