uski gali ko raushan ham hi ki.e hue hain | उसकी गली को रौशन हम ही किए हुए हैं

  - Ajit Yadav

उसकी गली को रौशन हम ही किए हुए हैं
दीपक ब'दन को दिल को बाती किए हुए हैं

वो मुड़ के कब हमारी जानिब को देखता है
हम तो पलट-पलट बस यूँँ ही किए हुए हैं

ऐसा नहीं कि उसका बस राह देखते हैं
हम उसके दर को अपना घर भी किए हुए हैं

मैं आज ग्रेजुएशन के बाद गाँव लौटा
जाँचा,पता किया वो शादी किए हुए हैं

उस की असीरी में हम तो क़ैद भी नहीं फ़िर
दिल पर मिरे वो क्यूँ मन-मानी किए हुए हैं

ऊपर अगर है हम से उसका मुक़ाम जग में
फ़िर क्यूँ वो इतना आना-कानी किए हुए हैं

उस में सिवा अना के कुछ भी नहीं है फ़िर भी
कुछ बात है जो दिल पर तारी किए हुए हैं

बचते थे, जी चुराते थे घर के कामों से हम
तेरे लिए अ'जित को माँझी किए हुए हैं

  - Ajit Yadav

Crime Shayari

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