उस की गली को रौशन हम ही किए हुए हैं

दीपक ब'दन को दिल को बाती किए हुए हैं

वो मुड़ के कब हमारी जानिब को देखता है
हम तो पलट-पलट बस यूँ ही किए हुए हैं

ऐसा नहीं कि उस का बस राह देखते हैं
हम उस के दर को अपना घर भी किए हुए हैं

मैं आज ग्रेजुएशन के बा'द गाँव लौटा
जाँचा,पता किया वो शादी किए हुए हैं

उस की असीरी में हम तो क़ैद भी नहीं फिर
दिल पर मिरे वो क्यूँ मन-मानी किए हुए हैं

ऊपर अगर है हम से उस का मुक़ाम जग में
फिर क्यूँ वो इतना आना-कानी किए हुए हैं

उस में सिवा अना के कुछ भी नहीं है फिर भी
कुछ बात है जो दिल पर तारी किए हुए हैं

बचते थे, जी चुराते थे घर के कामों से हम
तेरे लिए अ'जित को माँझी किए हुए हैं

— Ajit Yadav

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