पहले हम 'इश्क़ किया करते थे
हाँ कभी हम भी जिया करते थे
अपने दामन की कभी फ़िक्र न की
चाक औरों के सिया करते थे
पहले हर हाल में ख़ुश रहते थे
जाने क्या काम किया करते थे
चाहने वाले बहुत थे लेकिन
हम बस इक नाम लिया करते थे
कभी आँसू तो कभी मय 'अख़्तर'
जो मुयस्सर था पिया करते थे
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Akhtar Amaan
our suggestion based on Akhtar Amaan
As you were reading Sharaab Shayari Shayari