चीर कर सीने को रख दे गर न पाए ग़म-गुसार

दिल की बातें दिल ही से कोई बयाँ कब तक करे

मुब्तला-ए-दर्द होने की ये लज़्ज़त देखिए
क़िस्सा-ए-ग़म हो किसी का दिल मिरा धक धक करे

सब की क़िस्मत इक न इक दिन जागती है हाँ बजा
ज़िंदगी क्यूँ कर गुज़ारे वो जो इस में शक करे

— Akhtar Ansari

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